धर्म के नाम पर प्यार-मुहब्बत होना चाहिए, झगड़े व हिंसा नहीं

राष्ट्रीय

नई दिल्‍ली: भारत विभिन्न धर्मों का देश है, धर्म के नाम पर प्यार-मुहब्बत होना चाहिए, झगडे और हिंसा नहीं। इबादत के नाम पर दंगे नहीं होने चाहिए। प्रत्येक धर्म की पवित्र पुस्तक वतन की मुहब्बत की सीख देती है।

वतन की मुहब्बत ही ईमान है और ईमान ही मोक्ष का रास्ता है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य और भारतीय सद्भावना मंच के संरक्षक इन्द्रेश कुमार ने व्यक्त किए। वह रविवार को भारतीय सद्भावना मंच के तत्वावधान में दीनदयाल सभागार में आयोजित ‘‘आओ जड़ों से जुडे़ः राष्ट्र रक्षा सूत्र’’ विषयक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।

हिन्दुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दुस्तानी पहले है

इन्द्रेश कुमार ने कहा कि हिन्दुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दुस्तानी पहले है, हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख या ईसाई बाद में। हमारी परम्परायें, खानपान, पहनावा, बोली, भाषा, रीति-रिवाज एक हैं, अतएव हमें आपसी गलतफहमियों को दूरकर राष्ट्रसेवा का व्रत लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक मजहब को इज्जत और आजादी के साथ जीने की छूट देता है। हमें अपनी इबादत और पूजा करने की पूर्णतया आजादी है। उन्होनें आह्वान किया कि हम अपनी जड़ों से जुडें और भारत मां की एक संतान की तरह मिलजुल कर रहें, तभी देश का और समाज का विकास संभव है।

कार्यक्रम को झांसी-ललितपुर निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा सांसद अनुराग शर्मा ने भी संबोधित किया। शर्मा ने कहा कि देश की खुशहाली का रास्ता सभी धर्मों, जातियों की खुशहाली से होकर गुजरता है। अगर हमें खुशहाल रहना है तो आपसी मतभेदों और रुढ़ियों को छोडकर राष्ट्रहित में कार्य करना होगा।

जंगे आजादी में

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आल इंडिया खानकाह ऐसोशिएसन के उपाध्यक्ष सूफ़ी शाह सैयद जियारत अली मलंग हक्कानी मदारी (कानपुर) ने कहा कि इस्लाम इंसानियत और मुहब्बत का मजहब है, इस्लाम की सूफी और फकीर परम्परा ने प्रेम और भाईचारे का पैगाम दिया है।

जंगे आजादी में सबसे पहले फकीर आन्दोलन और संन्यासी विद्रोह ने बाबा मजनूं शाह मदारी (मकनपुर) और पंडित कामताप्रसाद (बिठूर) के नेतृत्व में जनता ने अंग्रेजों के खिलाफ परचम उठाया, जिससे कुपित होकर अंग्रेंजों ने खानकाह, दरगाहों और इबादतगाहों को नेस्तानाबूद करने का कार्य किया।

उन्होनें कहा कि फकीर और सूफी परम्परा ही देश की साझा संस्कृति की विरासत को आगे ले जाने का कार्य कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अनूप शिवहरे ‘देहाती’ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जड़ों की ओर लौटकर राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम को दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद, भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त कमांडर सोमदेव और फिल्म अभिनेता आरिफ शहडोली आदि ने भी सम्बोधित किया।

कार्यक्रम में गुलाम गौस खाँ प्रकोष्ठ, युवा मोर्चा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, सेना रानी लक्ष्मीबाई प्रकोष्ठ ने सहयोग किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, महारानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. सुशील चतुर्वेदी, वरिष्ठ समाज सेवी मनमोहन गेंडा, राजेश साहू, हाजी सगीर (मेरठ), हाजी हनीफ (मेरठ), रीना मिश्रा (जयपुर), डाॅ. मो. फुरकान (पीलीभीत), ऐजाज अहमद (नई दिल्ली) आदि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रंगकर्मी गिरधारी लाल ने जंगे आजादी के कोहिनूर गुलाम गौस खां की जीवनी पर आधारित एकल नाट्य प्रस्तुति दी।

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