सहरसा, 27 अप्रैल:प्रसव के दौरान गर्भवती एवं उनके परिजनों को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि, गर्भावस्था के अंतिम दौर यानी प्रसव के वक्त छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। इसलिए, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर किसी प्रकार की संकोच नहीं करें और संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दें। इससे न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा बल्कि, मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी। हर महिला को गर्भधारण के साथ ही मन में सामान्य और सुरक्षित प्रसव को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं। दरअसल, हर महिला सामान्य और सुरक्षित प्रसव चाहती है। किन्तु, यह तभी संभव है जब संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जाएगी। क्योंकि, वहाँ प्रशिक्षण प्राप्त योग्य एएनएम एवं चिकित्सकों को मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इस दौरान किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत आवश्यक व्यवस्था की जाती है।

पुराने ख्यालातों और अवधारणाओं से बाहर आने की जरूरत, संस्थागत प्रसव की बेहतर व्यवस्था :

सिविल सर्जन डॉ किशोर कुमार मधुप ने बताया, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को स्वस्थ्य एवं शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाती है। ताकि प्रसव के पश्चात भी माता एवं शिशु को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और होने पर तुरंत आवश्यक चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा सके। इसलिए, मैं तमाम महिलाओं एवं उनके परिवार वालों से पुराने ख्यालातों और मन में चल रहे तरह-तरह की अवधारणाओं से बाहर सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की अपील करता हूँ। साथ ही ग्रामीण चिकित्सक एवं दाई से भी इसके लिए सकारात्मक सहयोग की अपील करता हूँ।

सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :-

शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जिले के सभी पीएचसी में होती प्रसव पूर्व मुफ्त जाँच :-

सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है । साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमतावर्धन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है। साथ ही संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।

इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-

-साबुन या अन्य अल्कोहलयुक्त पदार्थों से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
. मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और दूसरों को जागरूक करें।

.बाहर निकलने पर सैनिटाइजर जरूर पास में रखें।

बाहर का खाना खाने से बचें और जहाँ सुरक्षा के मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता हो वहाँ बिलकुल नहीं खाएँ।

.साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

.भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

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