• सम्मानपूर्ण मातृत्व देखभाल को लेकर सदर अस्पताल में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन

• संस्थागत प्रसव में गुणात्मक सुधार लाना प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य

छपरा: मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जिले में कई योजनाएं संचालित हैं। ताकि, गर्भवती महिलाओं को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सके। साथ ही, सुरक्षित प्रसव के लिये सरकारी चिकित्सा संस्थानों को ज्यादा विश्वसनीय बनाया जा सके। इसके लिये सदर अस्पताल में सम्मानपूर्ण मातृत्व देखभाल को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसका संचालन स्वास्थ्य विभाग, केयर इंडिया और प्रोंटो इंटरनेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जिला सदर अस्पताल परिसर स्थित प्रसव कक्ष से जुड़े चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्स, सहयोगी कर्मियों में ओटी सहायक, लैब टेक्नीशियन, ममता, सफाई कर्मी को प्रशिक्षित करना था। ताकि, ये सभी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान माता एवं नवजात शिशुओं के साथ व्यावहारिक तरीके से पेश आयें और लोगों में अस्पताल प्रबंधन के प्रति सकारात्मक प्रभाव पड़े।

मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने के लिये सुरक्षित प्रसव जरूरी :

प्रोंटो इंडिया फाउंडेशन के ट्रेनर निशा मयूर ने कहा कि मातृत्व-शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने के लिये से सुरक्षित प्रसव जरूरी है। इसके लिये स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव संबंधी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है। इसके लिये प्रसव कक्ष का माहौल सकारात्मक होना जरूरी है। साथ ही मरीजों के साथ कर्मियों का सहयोगपूर्ण व सम्मानपूर्ण व्यवहार का होना भी जरूरी है। संस्थागत प्रसव में गुणात्मक सुधार लाना प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य से है। गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता से प्रसव संबंधी मामलों के निष्पादन में सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। इससे मातृत्व-शिशु मृत्यु दर के मामलों में अप्रत्याशित कमी लायी जा सकती है।

प्रसव के दौरान मातृत्व अधिकारों का संरक्षण जरूरी :

केयर इंडिया के डीटीएल संजय कुमार विश्वास ने कहा कि प्रसव के दौरान मातृत्व अधिकारों का संरक्षण जरूरी है। इसमें निजता का अधिकार, सुरक्षा, बुनियादी देखभाल जैसे अधिकार महत्वपूर्ण हैं। जो प्रसव को बेहद खुशनुमा व सुरक्षित बनाने के लिये जरूरी है। उन्होंने बताया, अस्पताल में गर्भवती महिला व उनके अभिभाव के आने पर उनके साथ कर्मियों का व्यवहार सहयोगात्मक व सम्मानपूर्ण होना चाहिये। ऐसा नहीं होने पर अस्पताल के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। इसके बाद प्रसव के पूर्व व प्रसव काल में जरूरी सलाह व देखभाल के लिये लोगों के अस्पताल आने की संभावना कम हो जाती है। इस कारण प्रसव पीड़िता ही नहीं गर्भस्थ नवजात के जान-माल की सुरक्षा का जोखिम कई गुणा बढ़ जाता है। मौके पर डीएस डॉ एसडी सिंह, स्टॉफ नर्स अर्चना कुमारी, केयर बीएम अमितेश कुमार मौजूद थे।

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