Water Man Dr. Rajendra Singh reaches Saran on Bihar Samvad Yatra

बिहार : जल पुरूष डॉ. राजेन्‍द्र सिंह किसी पहचान मोहताज नही हैं। वर्तमान समय में वह बिहार सरकार के द्वारा जल-जीवन-हरियाली से संबंधित संवाद यात्रा सभा का आयोजन आज समाहरणालय सभागार, सारण में किया गया।

सिंह के साथ में जल बिरादरी, आदर्श लोक कल्‍याण संंस्‍थान एवं इंडियन हिमालयन रिवर बेसिन कांउसिंल के तत्‍वाधान में 25 अप्रैल से बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतिश कुमार के द्वारा संवाद यात्रा शुरू किया गया था। उसी क्रम में आज सारण जिला में ‘जल पुरूष’ डॉ. राजेन्‍द्र सिंह एवं उनके साथी टीम पहुँची।

बिहार में संवाद यात्रा 25 अप्रैल से शुरू होकर यह 27 मई 2022 तक चलेगी। यात्रा में पर्यावरण प्रेमी एवं जलप्रहरी मनाेहर मानव के द्वारा किया जा रहा हैं। पर्यावरणविद्व डाॅ राजेन्द्र सिंह को विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है।

2001 ई0 में सामुदायिक नेतृत्व के लिए वाटर-हार्वेस्टिंग और जल प्रबंधन में समुदाय आधारित प्रयासों में अग्रणी कार्य के लिए रैमन मैगसेसे पुरस्कार, 2005 ई0 में ग्रामीण विकास के लिए विज्ञान और प्राधोगिकी के अनुप्रयोग के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार, 2008 ई0 में द गार्जियन ने उन्हें 50 लोगों की सूची में शामिल किया, जो ग्रह बचा सकते थे।

यह पुरस्कार जल के लिए नोबल पुरस्कार के रुप में जाना जाता है

2015 में स्टाॅकटोम वाटर प्राइज से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार जल के लिए नोबल पुरस्कार के रुप में जाना जाता है। 2016 में यूके स्थित इंस्टीच्यूट आॅफ जैनोलाॅजी द्वारा अहिंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में जिलाधिकारी सारण राजेश मीणा ने कहा कि विश्वप्रसिद्व पर्यावरणविद्व जलपुरुष के सारण आगमन से पूरा जिला गौरान्वित महसूस कर रहा है। विलक्षण व्यक्तित्व के स्वामी डाॅ राजेन्द्र सिंह जी के सुझाये गये सलाहों को गंभीरतापूर्वक जिला के जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम में लागू किया जाएगा।

सारण में संवाद सभा काे संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि बढ़ती हुई भयानक गर्मी, असामयिक वर्षा, ग्‍लेशियर का पिघलना, कही बाढ़ तो कही सूखे की त्रास्‍दी से छोटी-बड़ी सभी नदियों में भसंकर प्रदूषण, वन क्षेत्र का कम होना भी भूगर्भ में जलस्‍तर में लगतार कमी आदि से संपूर्ण मानव जाति के अस्तित्‍व व जीवन पर आने वाले दिनों में गंभीर संकट खड़ा कर देगा।

इन सभी परिस्थितियों सें बिहार भी आछूता नही हैं। बिहार सरकार के द्वारा प्रारंभ से किए गए वैश्विक महत्‍व की पहल ‘जल-जीवन-हरियाली’ कार्यक्रम काबिले तारिफ हैं। ‘जल-जीवन-हरियाली’ कार्यक्रम में जब तक राज्‍य के साथ समाज की भागिदारी नही होगी तब तक यह अभियाण पूर्णरूपेण सफल नही हो सकता है।

हम आने वाली पीढ़ी पर एक भयंकर खतरा सौप रहे है

वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय असंतुलन ने पूरी दुनिया पर संकट लाकर खड़ा कर दिया है। बिहार में बाढ़ और सुखाड़ का स्थाई समाधान भी हमारे पंरपरागत ज्ञानतंत्र में छिपा हुआ है। इसलिए यह यात्रा राज्य और समाज में संवाद स्थापित कर रही है ताकि बिहार के स्थानीय ज्ञानतंत्र के माध्यम से हम बिहार को बाढ़ और सुखाड़ से मुक्त करने का प्रत्यन कर सके।

आज भी हम अगर पंरपरागत जल स्त्रोतों, आहऱ, पईन, सोख्ता, ताल, पाल, झाल, पौधारोपण तथा प्रकृति संवर्धन के प्रति अपनी निजी तथा सामाजिक जवाबदेही बोध नही किये तो, हम आने वाली पीढ़ी पर एक भयंकर खतरा सौप रहे है।

इसी कारण से यह यात्रा आमनागरिकों विशेषकर रचनात्मक संगठनों बुद्विजीवियों, सामाजिक-राजनैतिक कार्यकताओं, जनप्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों आदि से संपर्क, परस्पर विचार-विमर्श, खुली चर्चा, जीवन्त बहस और सार्थक संवाद स्थापित कर रही है।

उनके द्वारा बताया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था कि पृथ्वी सबकी जरुरतों को पूरा कर सकती है। लेकिन किसी एक व्यक्ति के लालच की पूर्ति नहीं कर सकती है। यह मौलिक विचार ही प्राकति को सवंर्धित तथा समाज को शांति स्थापित करेगी।

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1 COMMENT

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