छपरा: ज्येष्ठ (जेठ) मास की अमावस्या तिथि पर सोमवार को सुहागिन महिलाओं ने अपनी पति की लंबी आयु की कामना को लेकर वट सावित्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुहागिन महिलाओं के द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ यह पूजन किए जाने की परंपरा है। जिसका निर्वहन करते हुए महिलाओं ने तेज धूप और गर्मी के बाद भी सुबह से लेकर भरी दोपहरी में वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी आयु की कामना की। इस पर्व पर महिलाएं सामूहिक रूप से एकत्रित होकर पूजा-अर्चना की तथा वट वृक्ष की परिक्रमा कर परंपरागत तरीके से कलावा भी बांधा। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे ही इस पर्व से जुड़ी हुई परंपरा की कथा भी महिलाओं ने सुना और एक-दूसरे को सुनाई। शास्त्रों के अनुसार बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रत्येक व्रत और त्योहार की अपनी अलग-अलग परंपरा होती है। जिसके चलते इस पर्व की भी एक परंपरा यह होती है कि एक बांस की टोकरी में सात तरह के अनाज रखे जाते हैं, जिसे कपड़े के दो टुकड़ों में ढंक दिया जाता है। एक दूसरी बांस की टोकरी में देवी सावित्री की प्रतिमा रखी जाती है। वट वृक्ष पर महिलाएं जल चढ़ाकर कुमकुम अक्षत चढ़ाते हैं फिर सूत के धागे से वट वृक्ष को बांधकर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। तत्पश्चात महिलाएं घरों में पहुंचकर फलाहार ग्रहण करती है। महिलाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह भी देखा गया।

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