बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी अनेक परेशानियों का महत्वपूर्ण कारण है कृमि संक्रमण

विद्यालयों में सामूहिक रूप से खिलायी जाएगी अल्बेंडाजोल

सहरसा, 21 अप्रैल: 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी कई प्रकार की परेशानियों के कारणों में उनका कृमि से संक्रमित हो जाना सबसे बड़ा कारण है। कृमि से संक्रमित बच्चों का न केवल शारीरिक विकास अवरूद्ध होता बल्कि अधिक दिनों तक कृमि से संक्रमित रहने के कारण उनमें कई प्रकार की अन्य बीमारियों से ग्रसित होने का भी खतरा बना रहता है। कृमि से संक्रमित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित रहने के कारण वे आसानी से अन्य बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि मुक्त करने के लिए 22 अप्रैल को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम आयोजित करते हुए एक साथ सभी बच्चों को कृमि नाशक अल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की निश्चित खुराक खिलाने का बहुउद्देशीय अतिमहत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी अनेक परेशानियों का महत्वपूर्ण कारण है कृमि संक्रमण-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. कुमार विवेकानंद ने बताया 1 से 19 वर्ष तक के बच्चे अपना भरपूर ख्याल नहीं रख पाते हैं। ऐसे में वे आसानी से कृमि संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। जिससे उनका शारीरिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। बच्चे कुपोषित हो जाते हैं क्योंकि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को उनके शरीर में पल रहे कृमि द्वारा नष्ट कर दिया जाता है। उन्होंने बताया इस आयु वर्ग के बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों का एक महत्वपूर्ण कारण कृमि से संक्रमित हो जाना है। जिससे मुक्ति के लिए कृमिनाशक अल्बेंडाजोल की गोलियों का सेवन सरकार द्वारा मुफ्त में कराया जाता है।

विद्यालयों में सामूहिक रूप से खिलायी जाएगी अल्बेंडाजोल-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को उम्र के हिसाब से तय मात्रा में अल्बेंडाजोल 400 मिलीग्राम की खुराक खिलायी जाएगी। इसके किसी प्रकार विपरीत परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। बच्चों को खाली पेट यह दवा नहीं खिलायी जानी है। इस आयु वर्ग के अधिकांश बच्चे शैक्षणिक कार्य में लगे हुए हैं इसलिए जिले के सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में सामूहिक रूप से बच्चों को कृमिमुक्त करने के लिए अल्बेंडाजोल की निर्धारित मात्रा खिलायी जाएगी। एक साथ सभी बच्चों को कृमिनाशक गोलियों का सेवन कराया जाना आवश्यक है ताकि कृमि संक्रमण का प्रसार रुक पाये। जिससे आगे चलकर कृमि संक्रमण के नये मामलों का मिलना रुक पायेगा,तभी हम स्वस्थ्य भविष्य की कल्पना कर सकते हैं। विद्यालयों में एक साथ बच्चों को कृमि नाशक गोलियाँ खिलाने के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी को दूर करने के लिए चिकित्सकों के दल गठित किये गये हैं। अभिभावकों से अनुरोध करते हुए उन्होने कहा बच्चों को कृमि मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम के दौरान अल्बेंडाजोल की निश्चित खुराक अवश्य खिलायें।

12 लाख से अधिक बच्चों को जिले में खिलायी जाएगी कृमिनाशक गोलियाँ-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया जिले में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों की अनुमानित संख्या 12 लाख 37 हजार 92 है। इसके लिए आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता, चिकित्सक, पारामेडिकल कर्मी, चिकित्सक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी, स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया तथा हितधारी संगठन आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, गैर सरकारी विद्यालयों के संचालकों व कर्मियों एवं अन्य से अपेक्षित सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया गंभीर रोग के इलाजरत बच्चे, वैसे बच्चे जो सर्दी, खांसी, बुखार या सांस संबंधी व्याधियों से ग्रसित हों उन्हें दवा न खिलायें। दवा खिलाने के विपरीत परिणाम बच्चों का कृमि से संक्रमित होना भी है। ऐसे में घबरायें नहीं कुछ देर में बच्चे स्वतः ठीक हो जाते हैं।

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