-प्रसव के दौरान दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को दिशा-निर्देश: आरपीएम

-प्रसव कक्ष एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर टीम ने की गहन जांच: डीपीएम

-अस्पताल प्रशासन ने संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर लेबर रूम को किया है विकसित: एमओआईसी

पूर्णिया, 09 जून: बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लक्ष्य योजना के तहत ज़िला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर रेफ़रल अस्पताल रुपौली के लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए राज्य से आई दो सदस्यीय टीम के द्वारा दौरा किया गया। इस दौरान टीम के द्वारा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से संबंधित जांच की गयी। निरीक्षण टीम में राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (आयुष) डॉ रजनीश कुमार एवं मोतिहारी सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक विजय चंद्र झा शामिल हैं। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमूल होदा, डीपीएम ब्रजेश कुमार सिंह, डीसीएम संजय कुमार दिनकर, डीसीक्यूए डॉ अनिल कुमार शर्मा, स्थानीय अस्पताल के एमओआईसी डॉ मिथिलेश कुमार, अस्पताल प्रबंधक सलीमा खातून, यूनिसेफ़ के क्षेत्रीय सलाहकार शिव शेखर आनंद, केयर इंडिया की ओर से तकनीकी पदाधिकारी डॉ देवब्रत महापात्रा, महम्मद हसन रजा, एनएमएस मधुबाला, यूनिसेफ़ की ओर से मोअमर हाशमी, नंदन झा, तनुज कुमार सहित स्थानीय अस्पताल के चिकित्सक एवं स्टाफ़ नर्स मौजूद रही।

पहले से बेहतर करने के लिए दिया गया आवश्यक दिशा-निर्देश: जांच टीम
राज्य स्तरीय टीम के सदस्यों यथा डॉ रजनीश कुमार एवं विजय चंद्र झा ने संयुक्त रूप से बताया कि स्थानीय रेफ़रल अस्पताल की विन्दुवार गहन जांच की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने के कारण गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं के साथ ही परिजनों द्वारा उचित देखभाल करना निहायत ही जरूरी होता है। रेफ़रल अस्पताल में हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन संस्थागत प्रसव से जुड़ी सेवाओं को पहले से बेहतर करने के उद्देश्य से लक्ष्य योजना के गाइडलाइन के अनुरूप अस्पताल को अभी भी बहुत कुछ करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है। फ़िलहाल जितनी व्यवस्था, साफ़-सफ़ाई, विभिन्न विभागों से संबंधित फाइलों का संधारण किया गया है उससे हमलोग काफी संतुष्ट हैं।

प्रसव के दौरान दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दिया गया आवश्यक दिशा-निर्देश: आरपीएम
क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान प्रसव कक्ष से संबंधित फाइलों की अद्यतन जानकारी ली गई। इसके लिए प्रसव गृह में पदस्थापित जीएनएम को बेहतर कार्य करने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। लक्ष्य टीम के द्वारा रेफ़रल अस्पताल के चिकित्सकों एवं जीएनएम को पहले ही प्रशिक्षित किया चुका था। हालांकि उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा गया कि प्रसूति विभाग में जरूरी दवाओं की आपूर्ति ससमय उपलब्धता रहनी चाहिए ताकि प्रसव के समय पर गर्भवती महिलाओं को किसी भी तरह से कोई परेशानी नहीं हो। निरीक्षण के दौरान टीम ने रेफ़रल अस्पताल के एमओआईसी डॉ मिथिलेश कुमार, अस्पताल प्रबंधक सलीमा खातून के अलावा प्रसव कक्ष की प्रभारी जीएनएम सहित अन्य विभागों से संबंधित स्टाफ़ नर्स से अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी ली। टीम के सदस्यों ने प्रसव कक्ष एवं प्रसूति विभाग में पदस्थापित चिकित्सक और जीएनएम से गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सुख सुविधाओं के संबंध में जानकारी लेने के बाद बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का भी दिशा-निर्देश दिया।

-प्रसव कक्ष एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर टीम ने की गहन जांच: डीपीएम
जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि रेफ़रल अस्पताल के दो दिवसीय निरीक्षण कार्यक्रम के तहत राज्यस्तरीय टीम के सदस्यों द्वारा स्थानीय अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए उपलब्ध संसाधनों को बिंदुवार जांच की गयी। प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह के आवश्यक फाइलों की गहन जांच करते हुए अस्पताल के अधिकारियों व कर्मियों से लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए गाइडलाइन से संबंधित सभी तरह के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रूप से जानकारी ली गई। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी सेंटर में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाना है। लक्ष्य योजना का मूल उद्देश्य प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह की सुख सुविधाओं को पहले से बेहतर बनाने के साथ ही इससे जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना होता है। मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लक्ष्य प्रमाणीकरण बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।

अस्पताल प्रशासन द्वारा संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर लेबर रूम को किया गया है विकसित: एमओआईसी
रेफ़रल अस्पताल रुपौली के एमओआईसी डॉ मिथिलेश कुमार ने बताया कि प्रसव कक्ष एवं मेटरनिटी सेंटर को लक्ष्य प्रमाणीकरण के गाइडलाइन के तहत संस्थागत प्रसव के लिए सुव्यवस्थित तरीक़े से तैयार किया जा चुका है। लक्ष्य के मानकों के अनुरूप प्रसव से संबंधित सभी तरह की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मालूम हो कि राज्य स्तरीय टीम के आने से पहले स्थानीय स्तर पर क्वालिटी सर्किल टीम, जिला स्तर पर जिला गुणवत्ता यकीन समिति और प्रमंडल एवं पटना से आई टीम के द्वारा निरीक्षण किया जा चुका है। इसके बाद ही निर्धारित मानकों के आधार पर राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से दो सदस्यीय टीम निरीक्षण करने के लिए पहुंची है। कम से कम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त होने के बाद इसे लक्ष्य प्रमाणीकरण का दर्जा मिलेगा।

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