सहरसा, 9 जून। सरकार द्वारा बच्चों की सुरक्षित एवं स्वस्थ्य भविष्य के लिये बाल हृदय योजना की शुरुआत की गई थी। जिसके तहत हृदय में छेद के साथ जन्मे बच्चों को इलाज की सुविधा दी जाती है। उनके इलाज में होने वाला सारा खर्च राज्य सरकार उठाती है। यह योजना उन माता-पिता के लिए वरदान साबित हुई जो आर्थिक तंगी के कारण हृदय में छेद के साथ जन्मे अपने बच्चों का समुचित इलाज करवाने में असक्षम हैं। इस योजना से हृदय रोगी बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आयी है। साथ ही स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने में सरकार की एक अनूठी पहल के तौर पर उभरकर सामने आयी है। जिले में गरीब तबके से संबंध रखने वाले माता-पिता बाल हृदय से पीड़ित बच्चों की बीमारी का इलाज करवाने में असमर्थ होते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं रहती है कि वे अस्पताल जाकर अपने बच्चे का इलाज करवा पायें। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कहीं और से भी आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती है। इस कारण बाल हृदय रोग से पीड़ित बच्चे अक्सर मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या का सामाधान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा बाल हृदय योजना की शुरुआत की गई थी।

आरबीएसके टीम का मिला भरपुर सहयोग-
सहरसा जिले के शहरी क्षेत्र वार्ड न0- 31 सहरसा बस्ती निवासी मो. इस्मतुल्लाह के बेटे मोहम्मद रहमान भी जन्म से हृदय रोग से पीड़ित था। इस्मतुल्लाह पान की दुकान चलाते हैं। अपने बेटे के इलाज के क्रम में जब वे राज्य की राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचे तो उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि उनका बच्चा जन्म से हृदय में छेद संबंधी रोग से ग्रसित है। जिसका इलाज काफी महंगा है। पटना से सहरसा लौटने पर उन्हें अखबार में प्रकाशित इस योजना के बारे में पता चला। जानकारी के बाद उन्होंने सदर अस्पताल सहरसा में संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों से इसके बारे में पता किया । सदर अस्पताल सहरसा द्वारा उनके बच्चे को मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत पंजीकरण करते हुए सफल इलाज राज्य से बाहर अहमदाबाद (गुजरात) भेजकर करवाया गया। जिसका सारा खर्च सरकार द्वारा किया गया। आज उनका बच्चा बिलकुल स्वस्थ्य है। उसकी हृदय की धड़कने सामान्य हैं। इसके लिए इस्मतुल्लाह ने सरकार एवं जिले की आरबीएसके टीम से मिले भरपुर सहयोग के लिए उनको धन्यवाद दिया।

13 बच्चों को अबतक मिल चुका है लाभ-
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के जिला समन्वयक डा. संजय कुमार शर्मा ने बताया जिले से अबतक कुल 13 बाल हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है। सभी बच्चे बिलकुल स्वस्थ्य हैं। समय समय पर उनका चेकअप राज्य की राजधानी पटना में कुशल चिकित्सकों द्वारा की जाती है। यह योजना गरीब अभिभावकों के लिए वरदान से कम नहीं है। उन्होंने बताया राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत अन्य कई गंभीर रोगों से ग्रसित बच्चों का सफल चिकित्सा करवाया जा चुका है।

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