छपरा,19 जुलाई : दस्त, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। जिसे नियंत्रित कर उन्हें असमय कुपोषित होने से भी बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य को सफल बनाने के लिए 15 जुलाई से जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य प्रशासन सतर्कता और मुस्तैदी से निश्चित समय सीमा के भीतर इस अभियान को सफल बनाने के प्रयास में लगा है। ताकि हर घर और हर बच्चे तक ओआरएस के रूप में राहत की पुड़िया पहुंचे। प्राथमिकता के आधार पर जहां पूर्व में डायरिया की समस्या हुई हो, तथा बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र और दूर दराज़ के क्षेत्र हैं उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओ.आर.एस. के पैकेट और जिंक की गोलियां पहुंचाने के साथ लोगों को दस्त नियंत्रण और प्रबंधन पर जागरूक किया जा रहा है।

डायरिया की पूरी तरह से रोकथाम के लिए साफ सफाई बेहद जरूरी:

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. चंदेश्वर सिंह ने बताया कि पूरे पखवाड़ा के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता न सिर्फ डायरिया की दवा का वितरण व बचाव की जानकारी देंगे, बल्कि साफ सफाई के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं । उन्होंने बताया डायरिया की पूरी तरह से रोकथाम के लिए साफ सफाई बेहद जरूरी है। दस्त की रोकथाम के लिए साफ व स्वच्छ पानी पीना, हाथों को साबुन से धोना, साफ सफाई का ख्याल रखने का अहम योगदान होता है। इन आदतों को अगर लोग अपनाएंगे और बच्चों में शुरू से इसकी आदत डालेंगे तो डायरिया से बचेंगे। बदलते मौसम में केवल बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी डायरिया से पीड़ित हो रहे हैं। इसके कारण डिहाइड्रेशन होने से समस्याएं बढ़ जाती एवं कुशल प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है।

इन लक्षणों पर ध्यान दें –
• लगातार पतले दस्त का होना
• बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना
• प्यास का बढ़ जाना
• भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना
• दस्त के साथ हल्के बुखार का आना
• दस्त में खून आना जैसे लक्षणों के आधार पर डायरिया की पहचान आसानी से की जा सकती है।

इन लक्षणों के दिखते ही सतर्क हो जाएँ । प्राथमिक उपचार के रूप में ओआरएस का घोल दिया जा सकता है जिससे निर्जलीकरण की स्थिति से बचा जा सके। अगर मरीज को इससे राहत न मिले तो बिना देर किए या किसी अन्य घरेलू या नीम हकीम द्वारा दिये गए उपचार से बचना चाहिए। तुरंत मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए ताकि शीघ्र इलाज की समुचित व्यवस्था हो सके।

ओआरएस घोल और जिंक टेबलेट के फायदे
• दस्त में कमी आती है।
• जल्द ही दस्त बंद हो जाते हैं।
• आने वाले तीन माह तक दस्त व निमोनिया से बचाव करता है।
• जिंक टैबलेट कैसे दें।
• दो माह से छह माह तक के बच्चे को दिन में एक बार आधी गोली मां के दूध से दें।
• छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चे को दिन में एक बार एक गोली मां के दूध या पानी से दें ।

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