गया, 4 मई। गर्भवती व शिशु स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला में मिशन इंद्रधनुष 4.0 का तीसरा राउंड चलाया जा रहा है। जिला में 1951 सत्र स्थलों पर तीन हजार गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के ​लिए चिह्नित करते हुए उनका आवश्यक टीकाकरण किया जाना है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ फिरोज अहमद ने बताया टीकाकरण संक्रामक बीमारियों से बचाता है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए काफी कारगर है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं। इस दौरान रोगी प्रतिरोधी क्षमता पर असर पड़ता है। शरीर की प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण कई प्रकार के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। टीकाकरण संक्रामक रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं का समय पर आवश्यक टीकाकरण जच्चा—बच्चा दोनों को स्वस्थ्य रखता है। प्रसव पूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को टेटनस, डिप्थेरिया और परट्यूटिस से बचाव के लिए आवश्यक टीकाकरण किया जाता है।

टी​डी वैक्सीन का टीका गर्भवती के लिए महत्वपूर्ण:
सेंटर फॉर डिजीज प्रीवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक गर्भावस्था में टेटनस, डिप्थेरिया और परट्यूटिस का टीकाकरण जरूरी है। इससे बचाव के लिए टीडी वैक्सीन दी जाती है। टीडी वैक्सीन इन सभी रोगों से बचाव में कारगर है। चूंकि टेटनस संक्रमण नवजात शिशुओं के मृत्यु का एक बड़ा कारण है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान ही टेटनस टाक्साइड के दो टीका लगाये जाते हैं। दोनों टीका लगभग एक माह के अंतराल पर दिया जाता है। वहीं काली खांसी से बचाव के लिए गर्भावस्था के 27वें से 36 सप्ताह के बीच टीकाकरण होता है। नवजात शिशु के लिए काली खांसी जोखिम भरा होता है।

गर्भवती का समय पर टीकाकरण कराया जाना जरूरी:
सीडीसी का कहना है कि गर्भवती का समय पर टीकाकरण कराया जाना आवश्यक है । इसमे किसी प्रकार की कोताही नहीं की जानी चाहिए। गर्भवती के टीकाकरण से शिशु की रोग प्रतिरोधी क्षमता भी मजबूत होती है। टेटनस व डिप्थेरिया दोनों ही संक्रामक रोग है। उच्च रक्तचाप, तंत्रिका तंत्र का प्रभावित होना, मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन व जबड़े में अकड़न व पीठ का आकार धनुषाकार होना, इसके प्रमुख लक्षण हैं। डिप्थेरिया संक्रमण से रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है । गर्दन में सूजन, बुखार व खांसी रहता है। इसके अलावा गर्भवती का फ्लू, हेपेटाइटिस ए और बी का भी टीकाकरण कराय जाना चाहिए।

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