• गोदभराई दिवस के दिन स्तनपान पर होगी चर्चा

“स्तनपान के लिए कदम बढ़ाएं : शिक्षित करें , सहयोग दें” थीम पर मनेगा सप्ताह

• ग्राम संगठन की बैठक में दी जायेगी जानकारी

 

छपरा,2 अगस्त : जिले में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस वर्ष का थीम “स्तनपान के लिए कदम बढ़ाएं : शिक्षित करें , सहयोग दें’ है। इस दौरान विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाया जायेगा। इसको लेकर आईसीडीएस के निदेशक ने पत्र जारी कर सभी डीपीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि अभियान के दौरान स्तनपान की महता के प्रति समुदाय को जागरूक करने हेतु विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित करते हुए जिला परियोजना व आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय बैठक, स्तनपान विषय को प्रमुखता देते हुए गोदभराई दिवस का आयोजन, आरोग्य दिवस का आयोजन, स्वयं सहायता समूहों व ग्राम संगठन की बैठक इत्यादि का आयोजन किया जाए। साथ ही इस दौरान स्तनपान को बढ़ावा देने एवं बोतल के दूध से मुक्ति हेतु जन जागरूकता फैलाई जाए। इस जागरूकता गतिविधि में सेविका, सहायिका, आशा, ममता, विकास मित्र, जीविका सदस्य, शिक्षक, पंचायती राज सदस्य के साथ-साथ सभी आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी है ।

जन्म के एक घंटे के अंदर पिलाना शुरू करें दूधः

सिविल सर्जन डॉ. सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि जन्म के एक घंटे के अंदर ही बच्चे को मां का दूध पिलाना शुरू कर देना चाहिए। मां का यह गाढ़ा-पीला दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता है। बच्चे के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जन्म से लेकर छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। इससे बच्चे न सिर्फ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होता है, बल्कि उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है जो कि उसका बीमारियों से बचाव करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने पर अगर बच्चा बीमार भी पड़ जाता है तो वह उससे आसानी से उबर जाता है। इसलिए मांओं को जन्म के बाद छह माह तक स्तनपान कराने पर जोर देना चाहिए।

मां का दूध बच्चों के लिए मुख्य पोषक तत्व:

नोडल पदाधिकारी रमेश चंद्र कुमार ने बताया कि बच्चे के जन्म से 1 घंटे के अंदर ही मां का दूध शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि मां का दूध ही बच्चों के लिए मुख्य पोषक तत्व होता है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु को लगातार 6 महीने तक मां का दूध पिलाना चाहिए। कोई भी बाहरी दूध या अन्य पदार्थ बच्चों को नहीं देना चाहिए क्योंकि जैसे ही बाहरी चीज बच्चों के शरीर में जाना शुरू होता है तो दस्त की संभावना काफी बढ़ जाती है।

मां का दूध क्यों जरूरी:

मां का पहला गाढ़ा पीला दूध बच्चों के लिए अति आवश्यक होता है। , क्योंकि मां का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता है। मां का दूध बच्चों को डायरिया रोग होने से बचाता है। साथ ही साथ मां के दूध में मौजूद तत्व बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। मां का दूध पीने वाले बच्चे का तेजी से विकास होता है।

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