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    क्या कोरोना 5G टेस्टिंग के कारण तबाही मचा रहा है, जानिए WHO और PIB ने क्या कहा?

    2021-05-04

    नई दिल्ली: देश में आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे संदेशों की भरमार है जिनमें कोरोना के लिए 5-G तकनीक की टेस्टिंग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि *5-G* टावरों की टेस्टिंग से निकलने वाला रेडिएशन हवा को जहरीला बना रहा है इसलिए लोगों को सांस लेने में मुश्किल आ रही है। साथ ही वायरल पोस्ट में ये भी कहा जा रहा है कि इसी रेडिएशन की वजह से घर में हर जगह करंट लगता रहता है। पोस्ट में सुझाव दिया जा रहा है कि अगर इन टावरों की टेस्टिंग पर रोक लगा दी जाती है तो सब ठीक हो जाएगा।

    कोरोना से जुड़े तथ्यों और भ्रमों पर विश्व स्वस्थ्य संगठन की तरफ से जारी रिपोर्ट में इस बात का खंडन किया गया है। 26 मार्च को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 5-G मोबाइल नेटवर्क से कोरोना नहीं फैलता है। इसके अलावा ये भी कहा गया है कि कोरोना मोबाइल नेटवर्क और रेडियो तरंगों के साथ एक जगह से दूसरी जगह पर नहीं पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना उन देशों में भी हो रहा है जहां 5-G मोबाइल नेटवर्क नहीं है।

    पीआईबी ने भी बताया फेक

    पीआईबी ने कहा है कि ये दावा एकदम फर्जी है। पीआईबी ने कहा है कि विश्वव्याप्त महामारी कोरोना वायरस को लेकर इस तरह की गलत और एकदम फर्जी सूचनाएं साझा करना ठीक नहीं है। इसके गंभीर परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। पीआईबी ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के किसी भी दावे पर आंख बंद करके भरोसा ना करें। आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने भी इस तरह के दावों की निंदा की थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 और 5-G तकनीक के बीच संबंधों की बात पूर्ण बकवास है और यह जैविक रूप से संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने कहा था कि जो लोग ऐसे पोस्ट शेयर कर रहे है वो सब कांस्पेरेसी थ्योरी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें 5-G की मदद से कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का झूठा दावा किया जा रहा है।

    एससी में केस दर्ज भारत में 5G इंटरनेट टावर परिक्षण पर प्रतिबंध लागने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका को वकील AP सिंह ने दायर किया है। याचिका में कहा कि भारत सहित आज दुनिया भर में 5G नेटवर्क का विरोध किया जा रहा है। 5-G नेटवर्क धरती के लिए एक बहुत बड़ा खतरा हैं, लेकिन मोबाइल कंपनियों ने 5-G स्मार्टफोन बेचना शुरू कर दिया है। याचिका में कहा कि 5-G इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, उपयोगकर्ताओं के डेटा को आसानी से हैक भी हो सकता है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि नीदरलैंड में परीक्षण के दौरान सैकड़ों पक्षियों की अचानक मौत हो गई थी, हेग शहर में 5-G नेटवर्क के परीक्षण के दौरान लगभग 300 पक्षियों की मौत हो गई, जिनमें से 150 पक्षियों की परीक्षण शुरू होने के बाद मौत हुई।