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    मधेपुरा जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 6 माह के बच्चों को कराया गया अन्नप्राशन

    2021-08-19

    मधेपुरा, 19 अगस्त: प्रत्येक माह की 19वीं तारीख को जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया जाता है जिसके तहत संबंधित आंगनबाड़ी केन्द्रों के पोषक क्षेत्रों के 6 माह के शिशुओं को अनुपूरक आहार खिलाया जाता है। इस अवसर पर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्वच्छता पूरा ख्याल रखते हुए खीर बनायी जाती है एवं 6 माह पूर्ण कर चुके बच्चों को खीर खिलाकर उनके ऊपरी आहर की शुरुआत की जाती है। इस दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयी महिलाओं एवं उनके परिजनों को शिशुओं के पोषण संबंधी जानकारी भी सेविकाओं द्वारा दी जाती है। समेकित बाल विकास परियोजना, मधेपुरा की जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी ने बताया शिशु एवं उनकी माताओं को सही पोषण हो सके इसके लिए जरूरी है कि उन्हें पोषण के बारे में उचित समझ विकसित की जाय एवं सही पोषण के फायदे से उन्हें अवगत कराया जाय। ऐसा करने से सामुदायिक स्तर पर लोगों में पोषण के प्रति जागरूकता आती है जो शिशु एवं माताओं के लिए बेहतर कल के लिए बहुत जरूरी है।

    अनुपूरक आहार की आवश्यकता एवं लाभ से कराया जाता है अवगत:
    अंशु कुमारी ने बताया इस अवसर पर न केवल वैसी मताएं  आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आती हैं  जिनके शिशु की उम्र 6 माह हो चुकी है|, उनके साथ और कई महिलाऐं आती हैं जो संभावित मां एवं 6 माह से अधिक के शिशुओं की माता भी रहती हैं। उनकी उत्सुक्ता इस बात पर ज्यादा होती है कि आज आंगनबाड़ी में क्या होगा? उनकी उत्सुक्ता जायज भी है। उन्हें अपने संभावित शिशु के पोषण, प्रसव पूर्व पोषण, प्रसव पश्चात पोषण आदि की जानकारी होना बहुत जरूरी है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक माह के 19वीं तारीख को अन्नप्राशन दिवस आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मनाये जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया 6 माह से 9 माह तक के शिशुओं को पूरे दिन में लगभग 200 ग्राम सुपाच्य एवं अच्छी तरह से मसला हुआ बाहरी आहार देना आरंभ कर देना चाहिए। वहीं 9 माह से एक वर्ष तक के शिशुओं को 300 ग्राम मसला हुआ ठोस ऊपरी आहार देना जरूरी है। एक वर्ष से अधिक उम्र के शिशुओं को आने वाले एक साल तक लगभग 500 ग्राम अनुपूरक आहार दिया जाना चाहिए। ताकि शिशुओं का सम्पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो सके।

    6 माह तक केवल स्तनापान:
    जिला पोषण समन्वयक ने बताया इस दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा माताओं को 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है। माताओं को इस बात से अवगत कराया जाता है कि मां में बनने वाला दूध उनके शिशु के लिए एक सुपाच्य एवं पौष्टिक आहार है।