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    गंभीर रूप से एनीमिया ग्रसित महिलाओं के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन जरूरी

    2021-07-29

    गंभीर रूप से एनीमिया ग्रसित महिलाओं के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन जरूरी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पर मैटरनिटी ईकाई की नर्सों को मिला प्रशिक्षण: गर्भकाल में अत्यधिक खून बहने से हो जाती है 38 प्रतिशत माताओं की मौत: इनमें 90 प्रतिशत जिंदगियों को सही प्रबंधन से किया जा सकता है सुरक्षित गया, 29 जुलाई। जिला में मातृ मृत्यु दर कम करने के दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई गंभीर प्रयास किये गये हैं। गर्भकाल में अत्यधिक रक्तस्राव होना मातृ मृत्यु दर अधिक होने की सबसे बड़ी वजह है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भकाल में अत्यधिक रक्तस्राव और इसके सही प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए नर्सों को आवश्यक प्रशिक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। इसे लेकर बुधवार तथा वृहस्पतिवार को जिले के विभिन्न अस्पतालों के मैटरनिटी ईकाई में पदस्थापित नर्सों को 'ब्लड ट्रांसफ्यूजन द्वारा प्रसूति संबंधी रक्तस्राव का प्रबंधन' विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। शहर के जयप्रकाश नारायण अस्पताल के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मातृ मृत्यु के विभिन्न कारणों, गर्भवस्था के दौरान रक्तस्राव, ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत तथा ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने के विभिन्न चरणों पर विस्तार से चर्चा की गयी। प्रशिक्षण में सदर अस्पताल सहित शेरघाटी व टिकारी अनुमंडलीय अस्पतालों की लगभग 37 स्टॉफ नर्स शामिल हुईं। यह प्रशिक्षण केयर इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया। 38 प्रतिशत मातृ मृत्यु का कारण अत्यधिक खून का बहना: प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि गर्भकाल में अत्यधिक खून का बहना मातृ मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारक है| 38 प्रतिशत मातृ मृत्यु का कारण रक्तस्राव होना है जबकि 11 प्रतिशत मातृ मृत्यु संक्रमण और 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु गर्भपात के कारण होते हैं| गर्भावस्था के दौरान खून बहने के कई कारण होते हैं| जिनमें प्रसव पश्चात अत्यधिक रक्तस्राव होना, गर्भाशय का प्लासेंटा से अलग हो जाना, गर्भाश्य का फट जाना, सर्जरी के दौरान अनियंत्रित खून का बहना व रक्त का थक्का जमने जैसे विकार शामिल हैं| गंभीर एनीमिया प्रभावित गर्भवती का ब्लड ट्रांसफ्यूजन जरूरी: प्रशिक्षण के दौरान उन स्थितियों की चर्चा की गयी जिसमें बल्ड ट्रांसफ्यूजन करना आवश्यक हो जाता है| बताया गया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन तब किया जाता है जब एक स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर से 25 प्रतिशत या अधिक मात्रा में खून नहीं रहता है| यदि यह स्थिति गर्भवती महिला के साथ है तो अधिक रक्तस्राव के कारण उसे हीमोरेजिक शॉक हो सकता है| इस स्थिति में उसके शरीर को आवश्यक मात्रा में आॅक्सीजन मिलना बंद हो जाता है| वहीं एनीमिया ग्रसित गर्भवती महिलाओं के सीजेरियन सर्जरी के समय ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है| गंभीर रूप से एनीमिया ग्रसित महिला को भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है| ब्लड सैंपल लेबलिंग के तौर तरीके बताये गये: प्रशिक्षण के दौरान ब्लड सैंपल लेबलिंग तथा इससे जुड़ी चेतावनी पर भी चर्चा की गयी| यह बताया गया कि रक्त की गुणवत्ता की पहचान करना आवश्यक है| ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया के पूर्व अच्छी तरह हाथ धोना जरूरी है| नर्स सही रोगी की पहचान करें तथा उनका ब्लड प्रेशर, पल्स, श्वसन गति, तापमान व ऑक्सीजन सैचूरेशन आदि को नोट करें|