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    लक्ष्य प्रमाणीकरण: रीजनल कोचिंग टीम ने किया बैसा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण

    2021-07-20

    पूर्णिया, 20 जुलाई: शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं को पहले से बेहतर करने के उद्देश्य से लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए बैसा प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) का दो सदस्यीय रीजनल कोचिंग टीम द्वारा निरीक्षण किया गया। टीम में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा एवं लक्ष्य इनिसिएटिव सह यूनिसेफ के प्रमंडलीय सलाहकार शिव शेखर आनंद शामिल थे। जिसका नेतृत्व आरपीएम नजमुल होदा ने किया। निरीक्षण के दौरान संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर कई तरह के आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित बैसा स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रसव से जुड़ी हुई स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से बेहतर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए आरपीएम के अलावा ज़िला स्तरीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा लगातार दौरा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। टीम द्वारा दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश के आलोक में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित कई अन्य कर्मी  संस्थागत प्रसव को लेकर पूरी तरह से सजग हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग, केयर इंडिया एवं यूनिसेफ की टीम द्वारा लगातार दौरा कर हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर बैसा स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रफ़ी जुबैर, बीएचएम आलोक कुमार वर्मा, बीसीएम राजेश रजक, लेखापाल अभिषेक कुमार बंटी, केयर इंडिया के बीएम रोहित कुमार सिंह, प्रशिक्षित जीएनएम में श्वेता भारती, शागुप्ता, दीपशिखा सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

     

    प्रसव कक्ष में कमियों को दूर करने के लिए एक सप्ताह का दिया गया समय: आरपीएम 
    ग्रामीण क्षेत्र स्थित बैसा स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने आये पूर्णिया प्रमंडल के क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रबंधक नजमुल होदा ने बताया पीएचसी बैसा के निरीक्षण के दौरान सुरक्षित प्रसव के लिए उपलब्ध संसाधनों की गहनता पूर्वक निरीक्षण किया गया हैं। प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह के आवश्यक फाइलों को लेकर गहन विचार विमर्श किया गया है। पीएचसी में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मियों सहित सहयोगी संस्थाओं में केयर इंडिया एवं यूनिसेफ सहित कई अन्य अधिकारियों से लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रमाणीकरण से संबंधित सभी तरह के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। निरीक्षण के दौरान प्रसव कक्ष से संबंधित सभी तरह की फाइलों की अद्यतन जानकारी ली गई है। प्रसव कक्ष में अविलंब मग्सल्फ़, कैल्सियम ग्लूकोनेट जैसी जरूरी दवाओं की आपूर्ति सहित कई अन्य सामग्रियों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाएं को ग्रामीण क्षेत्र स्थित बैसा पीएचसी में जिला स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निरीक्षण किया गया है। लेकिन प्रसव कक्ष में कमियों को दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। ताकि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इसे दूर किया जा सके। इनके सहयोग में केयर इंडिया व यूनिसेफ के अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है।

     

    मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए अस्पताल का लक्ष्य प्रमाणीकरण महत्वपूर्ण: यूनिसेफ़
    वहीं लक्ष्य इनिसिएटिव सह प्रमंडलीय सलाहकार शिव शेखर आनंद ने बताया लक्ष्य कार्यक्रम का मूल उद्देश्य यह होता है कि प्रसूति विभाग से संबंधित सभी तरह की सुविधाओं को सुदृढ़ बनाना और इससे जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना। जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के बाद जच्च बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिहाज से लक्ष्य प्रमाणीकरण बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी सेंटर, ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिए बनाये गए एसएनसीयू के गुणवत्ता में सुधार लाना होता है। प्रसव कक्ष में प्रसव से जुड़ी हुई हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए प्रशिक्षित जीएनएम को बेहतर कार्य करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। रीजनल कोचिंग टीम द्वारा पीएचसी के अधिकारियों व जीएनएम को प्रशिक्षित करने के साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिया गया हैं। 


    दिसंबर तक बायसी व रुपौली को किया जाएगा लक्ष्य प्रमाणीकरण:
    मालूम हो कि सदर अस्पताल, कसबा, बनमनखी, भवानीपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र को लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जा चुका हैं। बायसी व रुपौली स्वास्थ्य केंद्र को दिसबंर तक लक्ष्य योजना तहत प्रमाणीकरण तैयारियां शुरू कर दी गई है। क्योंकि बायसी में नया प्रसव कक्ष बनकर तैयार हो चुका है जबकि रुपौली में 15 दिनों के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा। जबकि शेष बचे स्वास्थ्य केंद्रों को भी लक्ष्य द्वारा प्रमाणीकरण किया जाना है। प्रसव से जुडी हुई तकनीकी सहायता केयर इंडिया एवं यूनिसेफ द्वारा जिला से लेकर स्थानीय स्तर पर किया जाता हैं।