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    बरसात के मौसम में डेंगू व चिकनगुनिया से सतर्क रहने की है जरूरत

    2021-07-19


    पूर्णिया, 19 जुलाई: मौसम में बदलाव के साथ बरसात की शुरुआत हो गई है। बरसात के  मौसम में लोगों के रहने वाले स्थलों पर अतिरिक्त पानी की स्थिरता की समस्या होने लगती है। स्थिर पानी में ही बहुत से कीटाणुओं का जन्म होता है जो विभिन्न बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। बरसात के मौसम में मुख्य रूप से मच्छर जनित रोगों जैसे डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है। मच्छरों से होने वाले इन रोगों से लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। डेंगू व चिकनगुनिया की बीमारी एडीज मच्छर के काटने से फैलती  है जो स्थिर पानी में पनपता है। जुलाई माह में बरसात की स्थिति होने के कारण लोगों को इसके प्रति सतर्क रहने की जरूरत होती है। इसलिए जुलाई माह को डेंगू रोधी माह के रूप में मनाया जाता है।
    लक्षणों के प्रति सावधान रहने की है जरूरत :
    जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर. पी. मंडल ने बताया डेंगू एवं चिकनगुनिया की बीमारी संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होती है जो लोगों को सामान्यतः दिन में काटता है। डेंगू का असर शरीर में 3 से 9 दिनों तक रहता है। इससे शरीर में अत्यधिक कमजोरी आ जाती है और खून का प्लेटलेट्स लगातार गिरने लगता है। वहीँ चिकनगुनिया का असर शरीर में 3 माह तक रहता है। गंभीर स्थिति में यह 6 माह तक भी रह सकता है। डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण तक़रीबन एक ही जैसे होते हैं। बरसात के इस मौसम में लोगों को इन लक्षणों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द ,जी मचलाना एवं उल्टी होना ,आँख के पीछे दर्द, त्वचा पर लाल धब्बे/चकते का निशान  ,नाक, मसूढ़ों से रक्तश्राव , काला मल का आना डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण होते हैं। लोगों को ऐसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करना चाहिए। 
    अतिरिक्त पानी के जमाव को रोकें :
    डॉ. मंडल ने बताया डेंगू/चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ पानी में ही पनपते हैं। इसलिए लोगों को बरसात के इस मौसम में अपने घर के आसपास या छत पर टूटे हुए बर्तन, प्रयोग में नहीं आने वाली बोतल, टीन, बेकार के टायरों इत्यादि को नहीं रखना चाहिए जहां पानी का जमाव हो सके क्योंकि बारिश के मौसम में इन्ही में पानी जमा होता है जिसमें एडीज मच्छर पनपते हैं। एडीज मच्छर हमेशा दिन में ही काटते हैं इसलिए बरसात के समय में दिन में लोगों को हमेशा पूरे शरीर ढ़कने वाले कपड़े पहनने चाहिए और सोने के समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। मच्छरों से बचाव के लिए घर की खिड़कियों पर जाले लगवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्षण के दिखाई देने पर इस बीमारी के उपचार हेतु पारासिटामोल सुरक्षित दवा है। यदि किसी व्यक्ति में पूर्व में डेंगू हो चुका है तो उन्हें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। वैसे व्यक्तियों को दोबारा डेंगू बुखार की शंका होने पर तुरंत सरकारी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
    बचाव हेतु ध्यान रखें कि :
    • घर में साफ सफाई पर ध्यान रखें ,कूलर एवं गमले का पानी रोज बदलें.
    • सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें. दिन में मच्छर भागने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें.
    • पूरे शरीर को ढंकने वाले कपडे पहने एवं कमरों की साफ़-सफाई के साथ उसे हवादार रखें.
    • आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें. जमा पानी एवं गंदगी पर कीटनाशक का प्रयोग करें.
    • खाली बर्तन एवं समानों में पानी जमा नहीं होने दें. जमे हुए पानी में मिट्टी का तेल डालें. 
    • डेंगू के लक्षण मिलने पर तुरंत ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें.