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    साफ पेयजल व ताजा भोजन का ध्यान रख डायरिया से करें बचाव

    2021-07-12

    गया, 12 जूलाई: ज़िले के कई प्रखंडों से डायरिया के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। डायरिया का सही समय पर सही उपचार जरूरी है। पाचन तंत्र से संबंधित इस बीमारी में अत्यधिक दस्त होने से मरीज के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी हो जाती है। शिशु व बच्चों सहित सहित बुजुर्ग डायरिया के शिकार हो सकते हैं। कुशल प्रबंधन के अभाव व डिहाइड्रेशन के कारण डायरिया जानलेवा हो जाता है। कुपोषित व कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों में डायरिया संक्रमण नुकसानदायक  होता है तथा आंत में सूजन हो जाती है। शिशु मृत्यु का एक बड़ा कारण डायरिया है। 

    दूषित पानी व भोजन से होता है डायरिया: 
    डॉ एम ई हक़ ने बताया डायरिया मुख्य रूप से दूषित पानी पीने या भोजन के सेवन से होता है। दूषित पानी व भोजन में डायरिया संक्रमण के वायरस मौजूद होते हैं जो पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। पाचन तंत्र में संक्रमण से मरीज को पतला दस्त होने लगता है। छोटे बच्चों में डायरिया का सही इलाज नहीं होने पर यह गंभीर हो जाता है। बच्चों में डायरिया के लक्षणों की पहचान कर आवश्यक इलाज कराना जरूरी है। लगातार पतले दस्त का होना, दस्त के साथ उल्टी, प्यास बढ़ना, भूख नहीं लगना और बुखार रहना आदि डायरिया के लक्षण हैं। इसके साथ ही पेशाब कम लगता है तथा सिरदर्द भी रहता है। डायरिया के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है तथा त्वचा का रंग पीला हो जाता हैं। ऐसे लक्षणों की पहचान कर बच्चों के तुरंत इलाज की जरूरत होती है। 

    डायरिया से बचाव के लिए इन उपायों को अपनायें: 
    शौच के बाद और खाना खाने से पहले हाथों को साबुन पानी से अच्छी तरह 40 सेंकेंड तक जरूर धोयें। बासी भोजन और बाहर के खानों से परहेज करें। रसोई व शौचालय की नियमित सफाई करें। बच्चों को जमीन पर गिरी हुई चीजें उठा कर खाने की आदत को दूर करें। फल को साफ पानी से धोकर ही खायें। छोटे बच्चों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। गंदी जगहों पर बच्चों को नहीं जाने दें। 

    डायरिया से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान: 
    डायरिया से निबटने के लिए घर में ओआरएस का पैकेट रखें। आवश्यकता पड़ने पर ओआरएस के घोल व जिंक टेबलेट का सेवन करायें। स्तनपान कराने वाली माताएं शिशु को नियमित स्तनपान कराती रहे। शिशु के डायरिया ग्रसित होने पर भी स्तनपान को नहीं रोंके। छोटे शिशु को स्तनपान ही करायें। उन्हें स्तनपान के अलावा बाहरी पानी आदि नहीं दें।