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    विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस विशेष: शिक्षा के साथ जागरूकता से बदलें पुरानी सोच,रहें बीमारियों से

    2021-05-27

    किशनगंज ,27 मई: विश्वभर की महिलाओं और लड़कियों में मासिक धर्म के कारण सामना की जाने वाले चुनौतियों के बारे में जागरूकता प्रसारित करने और इन चिन्हित समस्याओं के समाधान को उजागर करने के लिए प्रतिवर्ष 28 मई को मासिक स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरूआत वर्ष 2013 में वॉश (जल स्वच्छता एवं स्वास्थ्य रक्षा) द्वारा की गयी थी; और इस दिवस को पहली बार 28 मई 2014 में मनाया गया था। राष्ट्रीय परिवार इसका उद्देश्य एक ऐसे विश्व का निर्माण करना, जिसमें हर महिला और लड़की जिस भी समय अपनी निजता, सुरक्षा एवं गरिमा के साथ है, अपने मासिक धर्म को स्वस्थ तरीके से प्रबंधित कर सकती है।

    क्यों 28 तारीख को ही  मनाया जाता है माहवारी स्वच्छता दिवस:
    28 मई को पूरी दुनिया में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। 2014 से मनाने की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य है लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता रखने के लिए जागरूक करना था। तारीख 28 इसलिए चुनी गई, क्योंकि आमतौर पर महिलाओं के मासिक धर्म 28 दिनों के भीतर आते हैं। मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। महिलाओं में हर महीने होने वाली यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मासिक धर्म के दौरान, महिला के गर्भाशय से रक्त और अन्य तरल पदार्थ स्रावित होती है। हर महीने 3-5 दिन तक जारी रहने वाली यह प्रक्रिया  (10-15 वर्ष) से शुरू होकर रजोनिवृत्ति (40-50 वर्ष) तक चलती है।


    शिक्षा से ही सोच को बदला जा सकता है:
    सिविल सर्जन डॉ श्री नंदन ने बताया शिक्षा से ही समझ और जागरूकता आती है। इससे उन्हें अपने हक के बारे में पता चलेगा। लड़कियों को कम से कम यह तो पता लगे कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, शर्मनाक नहीं। हम उन्हें डरा देते हैं और वे समझती हैं कि शायद उन्होंने ही कुछ गलत किया है। शिक्षा से ही अंधेरा दूर होगा। सूचना से ही जागरूकता आएगी।महिलाओं को अपने शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया के बारे में समय से पहले बताया ही नहीं जाता था तो उनके मानसिक रूप से तैयार होने और स्वच्छता बनाए रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उल्टा उस स्थिति में उनसे, यह मत करो, वह मत करो। मंदिर मत जाओ, अचार मत छुओ। एक जगह बैठो, ऐसा सब कहा जाता था। जो बहुत ही अजीब और बुरी लगती थी, लेकिन उन्हें झेलना पड़ता था। हालांकि आज फिर भी इन तथ्यों पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है लेकिन आज भी गांव-देहात की महिलाएं मासिक धर्म को लेकर भ्रांति में जी रही हैं। उनमें न तो जागरूकता है और न ही उन्हें का उपयोग इससे होने वाली बीमारियों के बारे में पता है। 

    स्वच्छता के अभाव से होने वाली परेशानियां:
    मासिक धर्म में स्वच्छता नहीं होने के कारण देश की महिलाओं की जान भी जा रही है। हम सर्वाइकल कैंसर में पहले नंबर पर हैं इसलिए मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता न रखने पर बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। यह संक्रमण कभी-कभी यूट्रस तक भी पहुंच जाता है। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। मासिक धर्म के समय सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करें। इन्हें भी हर छह घंटे में बदलें। गीला रहने पर त्वचा में संक्रमण हो सकता है। इस्तेमाल किए गए पैड को सही तरीके से फेंकना भी बहुत जरूरी है, नहीं तो आसपास के वातावरण में भी बीमारियां फैल सकती हैं। प्रयोग किए गए पैड्स कागज में लपेटकर कूड़ेदान में डालें। ध्यान रखें कि माहवारी कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक साधारण शारीरिक प्रक्रिया है। अगर कोई समस्या है तो डॉक्टर की सलाह लेने में देर न करें। 

    मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां:
    नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम (वर्ष 2009), जिसमें स्कूलों में पीने के पानी और लिंग-आधारित (विद्यालयों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था) स्वच्छता सुविधाओं के मानकों को शामिल किया गया है। मासिक धर्म स्वच्छता योजना की शुरूआत वर्ष 2011 में चयनित जिलों के ग्रामीण इलाकों में किशोर लड़कियों (10-19 साल) के बीच मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी थी। वर्ष 2014 के बाद से इस योजना को मासिक धर्म स्वच्छता की जानकारी बढ़ाने, स्वच्छता प्रक्रियाएं सुधारने, सब्सिडी वाले स्वच्छता अवशोषक प्रदान करने और स्कूल में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सभी जिलों तक बढ़ा दिया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का सबला कार्यक्रम पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य (ग्रामीण  मातृ और बाल देखभाल केंद्रों) पर केंद्रित है। ग्रामीण विकास मंत्रालय का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन सेनेटरी पैड बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों और छोटे निर्माताओं को सहयोग करता है।