सरकारी प्रेस आमंत्रण पत्रों पर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक के साथ वेब मीडिया जोड़ेंः अमित रंजन

  • डब्ल्यूजेएआई छपरा चैप्टर के शिष्ट मंडल ने सारण डीएम से मिल कर सौंपा ज्ञापन
  • वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सारण डीएम को एक सूत्री माँग का सौंपा ज्ञापन

छपरा 30अक्टूबर: वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक शिष्टमंडल ने डीएम सुब्रत कुमार सेन से मुलाकात कर जनसंपर्क विभाग के प्रेस आमंत्रण पत्रों पर संबोधन में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ वेब मीडिया शब्द भी जोड़ने की माँग की। शिष्ट मंडल ने राष्ट्रीय महासचिव अमित रंजन के नेतृत्व में इस आशय का एक सूत्री माँगों का एक ज्ञापन भी डीएम को सौंपा। शिष्ट मंडल ने संगठन के उद्देश्यों के बारे में डीएम को अवगत कराते हुए माँग की कि जिला जनसंपर्क विभाग के स्तर पर जारी किए जाने वाले प्रेस आमंत्रण विषयक पत्रों पर प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक के साथ वेब मीडिया भी शुमार किया जाए। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने इस बाबत जिला जनसंपर्क पदाधिकारी को निदेशित किया।

समाहरणालय में मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय महासचिव अमित रंजन ने बताया कि जिलाधिकारी महोदय को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वेब पोर्टलों/ न्यूज़ वेबसाइटों के लिए मानक तय कर उन्हें दी जा रही सरकारी विज्ञापन और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी गई। डीएम को झारखंड में वेब पत्रकारों को प्राप्त सुविधाओं की भी जानकारी दी गई। राष्ट्रीय महासचिव ने बताया कि संगठन बिहार सहित अन्य राज्यों में भी वेब पत्रकारों की मान्यता, मान सम्मान और सुविधाओं के लिए वहाँ की सरकारों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है।

छपरा चैप्टर के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार पांडेय ने बताया कि डब्ल्यूजेएआई वेब पत्रकारों के हितों की रक्षा और इसे मानकीकृत करने के उद्देश्य से देश की एक मात्र निबंधित संगठन है।

छपरा चैप्टर के सचिव कबीर अहमद ने बताया कि डीएम को मयसाक्ष्य बताया गया कि जिले के अन्य सरकारी विभाग जनसंपर्क विभाग को जब प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया को आमंत्रित करने का पत्र भेज रहे हैं तो वहीं जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा वेब मीडिया शब्द हटा दिया जा रहा है।

कोषाध्यक्ष चंदन कुमार ने कहा कि वेब मीडिया के अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत छपरा से हो चुकी है जिसे अंजाम तक पहुँचाये बिना डब्ल्यूजेएआई शांत नहीं बैठने वाली।

शिष्ट मंडल में छपरा चैप्टर के संयुक्त सचिव जीतेन्द्र कुमार और हिमालय राज आदि मौजूद रहे।

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